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Thursday, December 31, 2009

नववर्ष मंगलमय हो - - आचार्य सुधांशु

नववर्ष मंगलमय हो

" नवसूर्य, नूतन किरणें , नव आशायें, नई आकांक्षाए, नव कमल, नव सुमन लेकर नववर्ष आया हैं । आईए ! इसका स्वागत करें, तमस के पार जाकर, भोर का उजाला अपने जीवन में बिखेरें । नववर्ष में भक्ति - शक्ति का जागरण हो, सुख समरिद्धि की अभिवृद्धि हो, इसी पावन मंगलकामना के साथ आप सभी भक्तों को शुभाशीष्।"

- आचार्य सुधांशु


Collection by : प्रवीण वर्मा

Tuesday, December 29, 2009

bhakti - Devotion


समर्पित भाव से भक्ति करो ,भगवान जरूर मिलेंगे !

Sunday, December 27, 2009

गुरु ज्ञान वाटिका के पुष्प - Knowledge by Guru


गुरु ज्ञान वाटिका के पुष्प - Knowledge by Guru

"एक पत्थर को तराशने से सुन्दर मूर्ति बन सकती है तो कर्मो के सहारे जिन्दगी को तराशने से बहुत सुन्दर स्वरुप बन सकता है। कर्म करने से पहले सोचें कि मेरे से कोई गलत कर्म न हो जाए। क्योंकि प्रकृति का नियम है कि कर्म-फल अवश्य भोगना पड़ता है और प्रकृति के नियम तुम बदल नहीं सकते । तुम्हारा गलत कर्म ही तुम्हारे लिए परेशानी पैदा करता है, इसलिए ऐसा कोई कर्म ना करो जो तुम्हें परेशानियों में डुबा दे और विपत्तियां तुम्हारे ऊपर मडराने लगें । ह्र्दय में परमात्मा का नाम लेते हुए कर्म करोगे तो गलत काम की सम्भावना नहीं रहेंगी ।"


परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज


Collection by : Praveen Verma VJM North America









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Posted By Madan Gopal Garga to AMRIT VANI at 12/27/2009 07:10:00 PM

Thursday, December 24, 2009

अमृत वचन


अमृत वचन

"मनुष्य के जीवन में सबसे पहले यह आवश्यक है कि हर समय प्रभु के अस्तित्व का एहसास हमारे मन में बना रहे। मन में ये प्रश्न हमेशा उठते रहें। इन बहती हुई

नदियों को बहाने वाला कौन है ? रंग-बिरंगी तितलियों के पंखों को कौन रंगता है? कौन है जो इस चन्द्रमा में मुस्कुराता है? किसका प्रकाश सूर्य के द्वारा संसार में फैलता है?


असंख्य जीवों को जन्म कौन देता है? कौन सबको भोजन देता है? फूलों में रंग कौन भरता है? पर्वत किसने बनाए? आकाश को सितारों से कौन सजाता है?


ऐसे अनेक प्रश्नों को मन में पैदा होने दीजिए । इससे आपके मन में ईश्वर के प्रति भावना जागेगी। आपका उनके प्रति विश्वास बढेगा।


परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज


Humble Devotee


Collection by : Praveen Verma








Friday, December 18, 2009

मन - Mind

मन

जब तक मन नहीं बदला जाए कुछ भी बाहर की चीज़ बदलने से कोई फैदा नहीं !
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश

Sunday, December 13, 2009

सदगुरु की अमृत वाणी

सदगुरु की अमृत वाणी
कुछ उदबोधन और जागृति के अक्षर अपने सामने रखकर जीवन जीओ जिससे आप सामान्य से ऊपर उठ सकें ।

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज


Collection by Praveen Verma

Sunday, November 29, 2009

Fw: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL] प्रेम का रंग

 
----- Original Message -----
Sent: Thursday, November 26, 2009 9:24 PM
Subject: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL] प्रेम का रंग

  • जीवन का सबसे सुंदर रग प्रेम हे ये ऐसा रंग हे जिसमें हर कोई रंगना चाहता हे जीना चाहता हे ! जिस घर में प्रेम नहीं हे ,श्रधा नहीं हे ,विशवास नहीं हे तो फिर वह घर खुशियां नहीं देता ! विश्वास ,प्रेम के धागे को बांधे हुए हे ! यदि विश्वास टूट गया तो प्रेम के धागे भी टूट जाते हें !

    देने वाले मालिक ने आपको बहुत कुछ दिया लेकिन सब कुछ नहीं दिया ,कुछ न कुच कमी रखी ! अगर कमि पर ध्यान देते रहोगे तो रोते रहोगे और अगर जो दिया हे उस पर ध्यान करोगे तो खुशी आयगी !
    गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश


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Madan Gopal Garga द्वारा GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL के लिए 11/14/2009 01:09:00 PM को पोस्ट किया गया

Wednesday, November 25, 2009

Fw: [GURUVANNI] गुरु ज्ञान वाटिका के पुष्प

 
----- Original Message -----
Sent: Saturday, November 21, 2009 7:57 PM
Subject: [GURUVANNI] गुरु ज्ञान वाटिका के पुष्प



"हमारे जीवन में विचारों की शक्ति का बडा मूल्य है । विचार वह है जो भाव बन करके आपके अन्दर से उठते है, लेकिन उन भावों में जो भाव सकारात्मक है, वे आपको शक्ति देते है और जो नकारात्मक विचार है वे आपकी शक्ति को खींचते है और खराब करते है। इसलिये अपने मन मै सदैव सकारात्मक विचार लायें।"

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज

"The power of thought has great value in our lives. Thoughts are simply what we feel inside. Positive thoughts give you a new energy and a fresh perspective. On the contrary, negative thoughts set us back and waste our energy. Therfore always have positive thoughts."

His Holiness Sudhanshuji Maharaj


Humble Devotee

Praveen Verma








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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 11/14/2009 08:03:00 PM

Tuesday, November 24, 2009

Fw: [GURUVANNI] उलझन

 
----- Original Message -----
Sent: Saturday, November 21, 2009 8:00 PM
Subject: [GURUVANNI] उलझन

उलझन



  • जिस समय तुम संसार में उलझ जाओ या परेशान हो जाओ ,अपने हृदय मन्दिर की संवेदना जगाते हुए हृद्य में बैठे भगवान का ध्यान करते हुए उसी से प्रार्थना करो कि हे भगवान ,मुझे रास्ता दिखाओ !आवेश में उलझ न जाऊँ !आवेश में अपने आपको गिराना नही हे ! होश में सोच समझकर शांत रहते हुए जीवन की समस्याओंको सुलझाना हे !आवेश में आयेंगे तो क्रोध का राक्षस शक्तिशाली हो जायेगा और बुधि विवेक नष्ट कर देगा !

    पूज्य सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 11/21/2009 05:49:00 AM

Monday, November 23, 2009

Fw: [GURUVANNI] अमृत वचन

 
----- Original Message -----
Sent: Saturday, November 21, 2009 8:01 PM
Subject: [GURUVANNI] अमृत वचन

अमृत वचन


"बहिर्मुख वृति आपकी बनी हुई है। ससार की तरफ घूमती हुई वृति, वो आपको परमात्मा की तरफ या कहना चाहिए अपने आपको जानने की तरफ नही जाने देती । और उसका परिणाम यह होता है कि हम एक भीड़ में ,जैसे भेड़ों का झुंड चलता है, उस तरह से, भीड़ की तरह से जीने लग जाते है। तो आप अपने अन्दर कोई विशेषता नहीं ला पाते।

आप अपने अन्दर एक पवित्र इन्सान बन सके, आप अपनी शान्ति के साथ जी सके, अपने प्रेम के साथ जी सके, अपने अन्दर एक सतोगुण को आप जन्म दे सके तो वो बहुत बडी चीज है।"



परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज

"Our instincts are outward focused. Our mindset is so much towards the world that it does not allow us to focus on God or even properly know ourselves.
The result of this outward focus is that we live like sheep and follow others instead of being able to bring peace within us.
It is indeed a great accomplishment if you can lead a sin free life in peace with love, purity and goodness."


(Translated by Humble Devotee
Praveen Verma)










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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 11/21/2009 02:10:00 PM

Sunday, November 22, 2009

Fw: [ADHYATMIK] गुरु ज्ञान वाटिका के पुष्प

 
----- Original Message -----
Sent: Saturday, November 21, 2009 8:16 PM
Subject: [ADHYATMIK] गुरु ज्ञान वाटिका के पुष्प



"हमारे जीवन में विचारों की शक्ति का बडा मूल्य है । विचार वह है जो भाव बन करके आपके अन्दर से उठते है, लेकिन उन भावों में जो भाव सकारात्मक है, वे आपको नई शक्ति देते है और जो नकारात्मक विचार है वे आपकी शक्ति को खींचते है और खराब करते है। इसलिये अपने मन मै सदैव सकारात्मक विचार लायें।"

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज

"The power of thought has great value in our lives. Thoughts are simply what we feel inside. Positive thoughts give you a new energy and a fresh perspective. On the contrary, negative thoughts set us back and waste our energy. Therfore always have positive thoughts."

His Holiness Sudhanshuji Maharaj


Humble Devotee

Praveen Verma




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Madan Gopal Garga द्वारा ADHYATMIK के लिए 11/14/2009 07:50:00 PM को पोस्ट किया गया

Fw: [ADHYATMIK] गुरु ज्ञान वाटिका के पुष्प

 
----- Original Message -----
Sent: Saturday, November 21, 2009 8:16 PM
Subject: [ADHYATMIK] गुरु ज्ञान वाटिका के पुष्प



"हमारे जीवन में विचारों की शक्ति का बडा मूल्य है । विचार वह है जो भाव बन करके आपके अन्दर से उठते है, लेकिन उन भावों में जो भाव सकारात्मक है, वे आपको नई शक्ति देते है और जो नकारात्मक विचार है वे आपकी शक्ति को खींचते है और खराब करते है। इसलिये अपने मन मै सदैव सकारात्मक विचार लायें।"

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज

"The power of thought has great value in our lives. Thoughts are simply what we feel inside. Positive thoughts give you a new energy and a fresh perspective. On the contrary, negative thoughts set us back and waste our energy. Therfore always have positive thoughts."

His Holiness Sudhanshuji Maharaj


Humble Devotee

Praveen Verma




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Madan Gopal Garga द्वारा ADHYATMIK के लिए 11/14/2009 07:50:00 PM को पोस्ट किया गया

Thursday, November 12, 2009

Fw: [GURUVANNI] जीवन

 
----- Original Message -----
Sent: Thursday, November 12, 2009 5:07 AM
Subject: [GURUVANNI] जीवन

  • जीवन स्वर्ण से नहीं खरीदा जा सकता ! रत्नों के ढेर उस क्षण को वापस नहीं ला सकते जो बीत गया ! इसलिये हर क्षण को अच्छे कार्य में बिता ! मछली कांटा लगे चोर को नहीं निगलती ,शेर बिछाये गये जाल में न फंसता यदि वह जानता होता ! अच्छी तरह याद रखो शरीर के नश्ट होने के बाद् भी तुम्हे जीवित रहना हे !
    गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 11/12/2009 05:05:00 AM

Wednesday, November 11, 2009

Fw: [AMRIT VANI] जीवन

 
----- Original Message -----
Sent: Wednesday, November 11, 2009 5:10 AM
Subject: [AMRIT VANI] जीवन



  • अपने जीवन मैं व्यस्तता अपनाओ अस्तव्यस्तता नही
    गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश

  • रश्मी बंसल


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Posted By Madan Gopal Garga to AMRIT VANI at 11/11/2009 05:00:00 AM

Tuesday, November 10, 2009

Fw: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL] चिंतन

 
----- Original Message -----
Sent: Monday, November 09, 2009 9:13 PM
Subject: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL] चिंतन



  • चिंता से चिंतन की और यात्रा करो, मन शांत होगा.

    गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश
    रश्मी बंसल


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Madan Gopal Garga द्वारा GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL के लिए 11/09/2009 09:05:00 PM को पोस्ट किया गया

Monday, November 9, 2009

द्वंद

द्वंद

  • "पूरा संसार द्वन्द्वमय है। हार-जीत, मान-अपमान, सुख-दुख, गर्मी-सर्दी, उन्नति-अवन्न्ति, ये सब द्वंद है। इसी से ससार बना हुआ है। दोनो तरह के रूपों के बीच जीवन बहता
    रहता है। इन दोनों के बीच जब सन्तुलन बनने लगता है तो अन्दर शांति आती है।"
  • गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश

Sunday, November 8, 2009

मुठी बंद रखो

मुठी बंद रखो
  • किसी भविष्य वक्ता के सामने हात मत फैलाओ और घर की बात मुठी में रख कर रखना किसी को बताना नहीं !
  • गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश

Saturday, November 7, 2009

Fw: [GURUVANNI] क्षमा

 
----- Original Message -----
Sent: Saturday, November 07, 2009 5:20 AM
Subject: [GURUVANNI] क्षमा

  • दूसरों के दोषों को क्षमा करने के लिए हमेशा तत्पर रहो ,पर अपने दोषों को गलतियों को कभी क्षमा नहीं करना चाहिये ,तभी आपका आत्मिक विकास होता हे !
  • गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 11/07/2009 05:14:00 AM

Friday, November 6, 2009

Fw: [GURUVANNI] अमृतवाणी

 
----- Original Message -----
Sent: Tuesday, October 27, 2009 9:47 AM
Subject: [GURUVANNI] अमृतवाणी

  • गुरु को संभाल लो तो गोविन्द भी पकड़ में आ जायेगा !
  • गुरु को सब से जयादा महत्त्व दो सब से पहले माँ ज्ञान देती है मगर गुरु संसार में जीने की कला देता है !
  • हर काम व्यवस्थित करो नियम se करो !
  • सदगुरु को समझना बड़ा मुशकिल है मगर जब उसके ज्ञान को समझेंगे तभी आप सच्ची तरह से गुरु को समझ पायंगे !
  • भगवान जिंदगी देता है मगर जीने की तरीका नहीं देता वह तो गुरु सिखाता है !
  • गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 10/27/2009 09:34:00 AM

Thursday, November 5, 2009

Fw: amritvani

 
----- Original Message -----
From: mggarga
To: mggarga
Sent: Thursday, November 05, 2009 9:16 PM
Subject: amritvani

 

"मनुष्य के जीवन में सबसे पहले यह आवश्यक है कि हर समय प्रभु के अस्तित्व का एहसास हमारे मन में बना रहे। मन में ये प्रश्न हमेशा उठते रहें। इन बहती हुई

नदियों को बहाने वाला कौन है ? रंग-बिरंगी तितलियों के पंखों को कौन रंगता है? कौन है जो इस चन्द्रमा में मुस्कुराता है? किसका प्रकाश सूर्य के द्वारा संसार में फैलता है?

असंख्य जीवों को जन्म कौन देता है? कौन सबको भोजन देता है? फूलों में रंग कौन भरता है? पर्वत किसने बनाए? आकाश को सितारों से कौन सजाता है? 

ऐसे अनेक प्रश्नों को मन में पैदा होने दीजिए । इससे आपके मन में ईश्वर के प्रति भावना जागेगी। आपका उनके प्रति विश्वास बढेगा।

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज

Humble Devotee
Praveen Verma

Wednesday, November 4, 2009

Fw: [GURUVANNI] बुद्धि और मन

 
----- Original Message -----
From: mggarga
To: mggarga
Sent: Wednesday, November 04, 2009 5:35 AM
Subject: Fw: [GURUVANNI] बुद्धि और मन

 
----- Original Message -----
Sent: Friday, October 30, 2009 12:08 PM
Subject: [GURUVANNI] बुद्धि और मन

  • भगवान गीता में कहते हें की जो मुझ में रमा हे और जो अपने मन और बुद्धि को कहीं और न लगा कर मुझ में लगाता हे में उसके लिए आसानी से सुलभ होजाता हूँ !
  • गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 10/30/2009 11:58:00 AM

Tuesday, November 3, 2009

Fw: [GURUVANNI] उपयोगी बातें

 
----- Original Message -----
Sent: Friday, October 30, 2009 12:28 PM
Subject: [GURUVANNI] उपयोगी बातें

  • बहस करते करते वहाँ मत पहुँचो जहाँ तकरार होने लग जाए !
  • कहीं से भी सुधार कर लो चाहे शाम हो वहीं से सुभह समझो !
  • ज्ञान अर्जन करने के लिए गुरु की शरण में जाओ !
  • प्रणाम करके झुक कर श्रधा से जिज्ञासा करो ताकि वे कुछ बता सकें !
  • साधक ban जाओ जो आपने सीखा उसको नियम वाले बन kar साधना करो !
  • अगर आपने संतोष की साधना की उस पर दिनभर हर काम men संतोशी रहो !
  • जो भी भगवान ने दिया हे vah तो भगवान का प्रसाद हे ,प्रसाद को थोडा जयादा नहीं देखा जाता वह तो भगवान् की क्रपा हे !
  • भगवान् से कहो जो तुझे पसंद हे वही मुझे भी पसंद हो जाए !
  • मन को अभ्यास से और ध्ययान से मन को काबू में कर सकए हो !
  • गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 10/30/2009 12:12:00 PM

Monday, November 2, 2009

Fw: Guruseva

 
----- Original Message -----
From: mggarga
To: mggarga
Sent: Monday, November 02, 2009 5:17 AM
Subject: Guruseva

Dear Brothers & sisters Hariom
By the ashirwad of Guruji I am sending you pravachanansh I request you to come forward & associate with me in doing this seva of Guruji so that this seva continues in case I am unable to do this .I hope you will come forward for this seva
mggarga
**********************************************************************
 
ज्ञान अर्जन करने के लिए गुरु की शरण में जाओ !
Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 10/30/2009 12:12:00 PM

Sunday, November 1, 2009

Fw: [GURUVANNI] उलझाना

 
----- Original Message -----
Sent: Saturday, October 31, 2009 9:20 PM
Subject: [GURUVANNI] उलझाना

  • हमारे कर्म हे उलझन हें !हम ठीक से सोच नहीं पाते तो उलझाते हें ! ठीक से चल नहीं पाते तो उलझाते हें !व्यवहार में दोष आता हे तो उलझाते हें !अगर दुनिया में उलझ जाना , तो एक काम करना -अच्छे ग्रन्थ पढ़ना , सत्संग करना ,एकांत में बैठ कर आत्मचिंतन करना ,इससे आपको बड़ी शान्ति मिलेगी !
  • गुरुवर सुधान्शुजी महाराज के प्रवचनांश


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 10/31/2009 09:14:00 PM

Saturday, October 24, 2009

Fw: [ANANDDHAM.ORG] संघर्ष

 
----- Original Message -----
Sent: Thursday, September 24, 2009 2:19 PM
Subject: [ANANDDHAM.ORG] संघर्ष

  • भगवान कृष्ण ने कहा कि जीवन एक संघर्ष है , चुनोती है ,परीक्षास्थल है ,रणक्षेत्र है ,इसका सामना करना होगा ,परीक्षा देनी ही होगी , संघर्ष तब तक रहेगा जब तक सांस चलेगा , इसलिए , संघर्ष से भागना नहीं स्थिर होकर उसका सामना करना !


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Posted By Madan Gopal Garga to ANANDDHAM.ORG at 9/24/2009 02:10:00 PM

Friday, October 23, 2009

Fw: [ANANDDHAM.ORG] अमृत वाणी

 
----- Original Message -----
From: mggarga312
To: mggarga
Sent: Thursday, October 22, 2009 9:18 PM
Subject: Fw: [ANANDDHAM.ORG] अमृत वाणी

 
----- Original Message -----
Sent: Thursday, October 22, 2009 9:07 PM
Subject: [ANANDDHAM.ORG] अमृत वाणी

  • इन्दरियाँ नौकर हें और उनका स्वामी इन्द्र हे -इन्द्र के मतलब हे आत्मा !
  • असुरों का लक्ष स्वयं से संबधित हे बस हम खुश तो सब खुश !
  • हम किसी को छेड़ेंगे नहीं मगर कोई हमको छेड़ेगा तो उसको छोडेंगे नहीं !
  • आपके अन्दर शान्ति अगाध हो मगर साथ साथ दुष्टता को दमन कराने के हिमत भी हनी चाहिए !




पूज्य सुधान्शुजी महाराज
20-8-09 के टी वी प्रवचन से

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Posted By Madan Gopal Garga to ANANDDHAM.ORG at 10/22/2009 08:56:00 PM

Monday, October 19, 2009

Pawan Deepmala

Pawan Deepmala

दीपावली का ये पावन पर्व प्रति वर्ष हमारे लिये एक अत्यंत कल्याणकारी सन्देश लेकर आता है हम घर का कोना कोना साफ करते है पर अपने मन को जरा भी साफ नहीं करते प्रति वर्ष हम रात्रि को दीप जलाते है पर अपने ज्ञान दीप को नहीं जलाते ये चिंतन का विषय है कि क्या ३६४ दिन प्रतीछा करने के बाद ये पर्व सिर्फ इस लिये आता है कि हम रात्रि होने पर दीपक जलाये वो तो हम रोज जलाते है और पटाखे छुडाये मिठाई खाए बस इससे तो इस पर्व का महान बनाने वाला सन्देश ही प्रकट नहीं होता
दीपावली ये महान सन्देश लेकर आई है कि हम अपने मन को व्यर्थ संकल्पों विकल्पों और अशुद्ध संकल्पों से हटा कर परमात्मा कि याद में लगाये और अपने दीप ( आत्मा ) को परमात्मा कि सक्तियों ( शांति, प्रेम, आनंद, शहनशीलता, पवित्रता, अंतर्मुखता, विनम्रता, हर्शित्मुखता.........) का आह्वान करे और आपने आत्मा रुपी दीप को प्रभु शक्तियों कि दीप्ति से भरपूर कर लीजिये

Madan Gopal Garga द्वारा ADHYATMIK

Thursday, October 15, 2009

बोध कथाएँ

बोध कथाएँ



प्रथम संस्करण : श्रद्धा पर्व २००९

प्रतियाँ :११००

मूल्य :६0 रुपये

सम्पादन :डा:नरेंद्र मदान

Madan Gopal Garga to ANANDDHAM.ORG at 10/15/2009 02:28:00 PM

बहादुर

बहादुर

  • बहादुर रो़या नहीं करते , भगवान् से अपने तार जोडो !


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 10/09/2009 09:54:00 AM

Sunday, October 11, 2009

जीना मरना

जीना मरना

  • न जीना आया न मरना वही दुःख !


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 10/09/2009 09:55:00 AM

Saturday, October 10, 2009

महाराजश्री के आगामी कार्यक्रम Schedule of VJM Programs

महाराजश्री के आगामी कार्यक्रम

Schedule of VJM Programs

  • ८ से ११ अक्टूबर ,२००९ -- श्री गणेश लक्ष्मी महायग ,आनंदधाम आश्रम
    २२ से २५ अक्टूबर ,२००९ ---ध्यान-साधना ,रामनगर ,नैनीताल (उत्तराखंड )
    १ नवम्बर २००९ ---मासिक सत्संग (आनंदधाम आश्रम ,दिल्ली )
    २ नवम्बर २००९ ---पूर्णिमा सत्संग ( आनंदधाम आश्रम दिल्ली)
    ४ से ८ नवम्बर २००९ ------फरीदाबाद ( हरियाणा)
    १४ से १५ नवम्बर २००९ -- महिपालपुर ,दिल्ली
    २५ से २९ नवम्बर २००९ ---गुड्गावं ( हरियाणा )
    २ दिसम्बर २००९ ---पूर्णिमा , आनन्दधाम आश्रम दिल्ली
    ६ दिसम्बर २००९ --------मासिक सत्संग ,आनन्दधाम आश्रम दिल्ली
    १० से १३ दिसम्बर २००९ ----- सूरत गुजरात
    २३ से २७ दिसम्बर २००९ ------नागपुर महाराष्ट्र्
Posted By Madan Gopal Garga to ANANDDHAM.ORG at 10/10/2009 08:19:00 PM

Friday, October 9, 2009

धन

धन

  • धन मिल भी जाए तो भी दुःखी न मिले तो भी दुःखी !


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 10/09/2009 09:57:00 AM

Monday, October 5, 2009

मन की शान्ति ( भाग ९)

मन की शान्ति ( भाग ९)

  • हमेशा अपने आपको कोसते मत रहो !
  • अपना काम ख़ुद कराने की आदत डालो !
  • किसी से अपनी तुलना मत करो !
  • सुनाने की आदत डालो सुननाने की नहीं !
  • अपने से नीचे देख कर चलो ऊपर नहीं !

Shirish Balekundri

www.VJMS.net www.Ambonieum.com www.SatguruHomeopathy.com

Saturday, October 3, 2009

मन की शान्ति (भाग ६) Peace of Mind Part 6

मन की शान्ति (भाग ६) Peace of Mind Part 6

  • घर में शान्ति बनाने के लिए अगर कुछ सहना भी पड़े तो सह लो !
  • वयायाम और प्राणायाम रोज़ नियम से करो !
  • माथा हमेशा ठंडा रखो !
  • विश्वास को कम मत होने दो
  • शंका-शक -संशय कराने की आदत छोडो
Guruvar Sudhanshuji Maharaj ke Pravachanans

Powder Blue Productions LLC



Thursday, October 1, 2009

गीता The Githa - Divine Knowledge of Life


गीता The Githa - Divine Knowledge of Life

जिसने गीता की अमृतमयी -ज्ञान की बूंदों को चख लिया उसके लिए स्वंय का कष्ट तो कष्ट रहता ही नहीं ! वह दुनिया के कष्टों का निवार्ण करने के लिये निकल पङता हें !

Param Pujya Sudhanshuji Maharaj

Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 9/24/2009 02:02:00 PM

Wednesday, September 30, 2009

आनंद रहने का तरीका 6 Ways to Remain Happy

आनंद रहने का तरीका
6 Ways to Remain Happy

  • अगर मनुष्य नीचे की ६ चीजों का ध्यान रखें तो हमेशा आनंदित रहेंगे ,
  • मैत्री - अच्छे लोगों से करो
  • उपेक्षा - बुरे लोगों से करो
  • करुणा - दुखियों पर करो
  • मुदिता - ऊपर उठने वालों को देख कर खुश होओ
  • सम -- दुःख और सुख में सम रहो
  • विवेक --पाप और पुण्य में विवेक करो


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Madan Gopal Garga द्वारा GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL के लिए 9/29/2009 09:19:00 PM को पोस्ट किया गया

Tuesday, September 29, 2009

अमृत वचन Notes of Ambrosia

अमृत वचन
Notes of Ambrosia

"शरीर की शुद्धि जल से होती है,

मन की शुद्धि सत्य से होती है,

आत्मा की शुद्धि विद्या और तप से होती है,

बुद्धि की शुद्धि ज्ञान से होती है।"

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज

Humble Devotee Praveen Verma


Water purifies the Body,

Truth purifies the Mind, Knowledge and devout austerity purifies the Soul,
Intellect gets purified by the inner wisdom.

His Holiness Sudhanshuji Maharaj

Humble Devotee
Praveen Verma

Sunday, September 27, 2009

निंदक Critic

निंदक
Critic

  • निंदा करने वाला तो आपका हितैशीs है क्यूंकी वो एक मनोचिकित्सक कि तरह आपके दोषों पर प्रकाश डालता है वो भी बिलकुल मुफ्त !
  • विद्यानंद दीक्षित

अमृत वचन Notes of Ambrosia

अमृत वचन Notes of Ambrosia

"शरीर की शुद्धि जल से होती है,

मन की शुद्धि सत्य से होती है,

आत्मा की शुद्धि विद्या और तप से होती है,

बुद्धि की शुद्धि ज्ञान से होती है।"

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज


Water purifies the Body,
Truth purifies the Mind,
Knowledge and devout austerity purifies the Soul,
Intellect gets purified by the inner wisdom.

His Holiness Sudhanshuji Maharaj


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Shirish Balekundri

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Friday, September 25, 2009

प्रेम Love

प्रेम
Love

  • अपने अहंकार को खत्म करके प्रेम भाव से घर - गृह्स्ती में रहना चाहिए ! गृहस्त में हर पति - पत्नी को अपने अन्दर के अहम भावों को ,अपनी जिद्द को आगे नहीं आने देना चाहिए !प्रेम की शक्ति से बडा कोइ बल नहीं हे और प्रेम की कोइ कीमत नहीं ! जिन के अन्दर प्रेम है ऊन्हें खरीदा नहीं जा सकता 1प्रेम में शिकायत नहीं ,प्रेम मिट जायेगा तो विकास रुक जायेगा !घर में अशान्ति हो तो शरीर का विकास रुक जायेगा इसलिए परिवार के सदस्यों में आपस में बहुत प्रेम होना चाहिए !

Thursday, September 24, 2009

भावनायें Emotions

भावनायें
Emotions

सृष्टि का आधार है गृहस्त आश्रम और सुखी गृहस्त का आधार है प्रेम एवं सहानुभुति ! घर परिवार में मनुष्य को प्रेम -सहानुभूती चाहिए !भावनायें संबंधों को मजबूत करने में बहुत काम आती हैं , बच्चे के जीवन में माँ बाप के वात्सल्य के बिना बहुत कुछ अविकसित रह जाता है !जहां प्रेम है वहां समर्पण भी है !शादी के समय वर कन्या एक दुसरे को हार पहनाते हैं , अगर उस हार के अन्दर का धागा टूट जाए तो फूल बिखर जाते हैं ! जैसे वह हार नहीं रहता ऐसे ही गृहस्त जीवन प्रेम के धागे से बंधा रहता है और प्रेम टूट गया तो परिवार बिखर गया !घर परिवार में प्रेम नहीं तो व्यक्ति कितना ज्ञानी ,कितना ध्यानी और कितना ही बली और बहादुर क्यों न हो मिट जायेगा !

Wednesday, September 23, 2009

धन Wealth

धन
Wealth

धन साधन हें साध्य नहीं !यह मंजिल पर पहुँचने के लिए वाहन हें लेकिन मंजिल नहीं ! धन आपको यंत्र दे सकता हें , संगीत नहीं , मकान दे सकता हें आराम नहीं ! नौकर दे सकता हें पर वफादार सेवक नहीं ! इसलिए धन को मंजिल पर पहुंचाने का साधन तो बनाओ पर धन को ही मंजिल मानकर मत् बैठ जाओ !

Tuesday, September 22, 2009

अमृत वचन Quotes of Ambrosia

अमृत वचन
Quotes of Ambrosia

"महानता जब आपके अन्दर जागती है तो आप नीचा कुछ भी कार्य नहीं करेगें। ऐसा कुछ भी नहीं करेंगें जिससे आपको खुद भी निराशा हो।

इसलिए ध्यान रखें जैसे जैसे हम प्रभु के निकट होते जाते है हमारे अन्दर एक पूर्णता आती है , हमारा अधूरापन दूर होता है,

हमारी सम्पूर्णता जाग्रत होने लग जाती है।"

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज

"Nobility will not let you do anything which is lowliness and inferior. You will also not do anything which brings regret and discontent.

So keep it in mind, having a close relation with God brings wholeness and totality in us. Scarcity and imperfection fade away and totality

awakens."

His Holiness Sudhanshuji Maharaj

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Monday, September 21, 2009

काल Cycles of Time

काल
Cycles of Time

  • काल की लहर आती है और व्यक्ति के सभी सपनों को उजाड़कर चली जाती है ! इसलिए अपने आपको उससे जोडें , मृत्यु भी जिसकी दासी है !


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Madan Gopal Garga द्वारा ADHYATMIK के लिए 9/18/2009 09:31:00 AM को पोस्ट किया गया

Sunday, September 20, 2009

झूट A Lie

झूट
A Lie



  • झूट बोलने वाला शुरू में प्रभाव जमा लेगा ,मगर बाद में अपना विश्वास खो देगा !

Saturday, September 19, 2009

अमृत वचन - Words with Ambrosia

अमृत वचन - Words with Ambrosia



"महानता जब आपके अन्दर जागती है तो आप नीचा कुछ भी कार्य नहीं करेगें। ऐसा कुछ भी नहीं करेंगें जिससे आपको खुद भी निराशा हो।

इसलिए ध्यान रखें जैसे जैसे हम प्रभु के निकट होते जाते है हमारे अन्दर एक पूर्णता आती है , हमारा अधूरापन दूर होता है,

हमारी सम्पूर्णता जाग्रत होने लग जाती है।"

 

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज

 

 

"Nobility will not let you do anything which is lowliness and inferior. You will also not do anything which brings regret and discontent.

So keep it in mind, having a close relation with God brings wholeness and totality in us. Scarcity and imperfection fade away and totality

awakens."

 

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भूल Ignorance

भूल
Ignorance



  • भूल होना मनुष्य की प्रकृति है ! भूल को भूल मानकर सुधार करना संस्कृति है ! भूल को भूल न मानना विकृति है जो की व्यक्ति को पतन की और ले जाती है !


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Madan Gopal Garga द्वारा GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL के लिए 9/18/2009 05:34:00 PM को पोस्ट किया गया

Friday, September 18, 2009

छ: दोष Six Shortcomings

छ: दोष
Six Shortcomings

उंनती चाहने वाले पुरुष को निंद्रा ,तंद्रा ,क्रोध ,आलस्य और दीर्घसूत्रता - इन छ: दोषों का त्याग कर देना चाहिए !

Thursday, September 17, 2009

श्रेष्ट कर्म

श्रेष्ट कर्म

पेड़ से पत्ता तोड़ना आसान हें ,मगर तोड़कर फिर जोड़ना आसान काम नहीं हें ! अर्थात टूटे को जोड़ना , गिरे को उठाना और निराश को आशावान बनाना श्रेष्ट कर्म हें !

Anand Dham Mumbai Maharashtra

Wednesday, September 16, 2009

अमृत वचन Ambrosia Quotes

अमृत वचन
Ambrosia Quotes


"हम इस बात को समझें कि सफलताएँ जो जीवन में घटी, उन्हें याद करें और उनसे सबक लें , जिससे उनको दोहराया जा सके।

अपनी विफलताओं को भी याद करो, बारबार उन पर भी ध्यान दो, उनसे भी सबक लो कि वो क्यों घटी ?

और उनको इसलिए ध्यान में रखो कि वो फिर दोहराईं ना जा सकें ।"

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज


"We should remember the accomplishments and achievements that happened in our lives and learn from them so that they can be repeated.
Also remember the disappointments and failures, pay close attention to them over and over, learn from them as to why it happened ?
The reason we should pay close attention to, so that they can not be replicated or repeated."


His Holiness Sudhanshuji Maharaj


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Posted By Madan Gopal Garga to AMRIT VANI at 9/16/2009 05:32:00 AM

Tuesday, September 15, 2009

खुश रहो Be Happy

खुश रहो Be Happy

  • यह सोचो कि जो कुछ भगवान ने दिया है बहुत दिया है और उसी में खुश रहो !

Shirish Balekundri

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Fw: [GURUVANNI] खुश रहो

 
----- Original Message -----
Sent: Thursday, August 27, 2009 12:40 PM
Subject: [GURUVANNI] खुश रहो

  • यह सोचो कि जो कुछ भगवान ने दिया है बहुत दिया है और उसी में खुश रहो !


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 8/27/2009 12:39:00 PM

मन में केवल भगवान को बिठाइये

"भगवान को पाने के लिये मन में केवल भगवान को बिठाइये। संसार मै रहिये, किन्तु संसार को मन में मत बसा लीजिये।

परमात्मा का नूर चारों ओर बरस रहा है, फूलों में , नदियों में , तितलियों के रंगबिरंगे पंखों में । समस्त सृष्टि उसकी सुन्दर रचना है।

इसे पर्यटक बन कर भोगो।"

 

परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज

 
 
"Only god should be in our minds if we want to acquire him. One can live in the world but the world should not be in the mind all the time.
God's ravishing and stunning beauty is everywhere, in flowers, in rivers and in the colorful feathers of butterflies.
Whole universe is his exquisite and magnificent creation. Enjoy all this as a traveler or tourist."
 
His Holiness Sudhanshuji Maharaj
 
 
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Monday, September 14, 2009

सदगुरु की अमृत वाणी

सदगुरु की अमृत वाणी

"भगवान को पाने के लिये मन में केवल भगवान को बिठाइये। संसार मै रहिये, किन्तु संसार को मन में मत बसा लीजिये।

परमात्मा का नूर चारों ओर बरस रहा है, फूलों में , नदियों में , तितलियों के रंगबिरंगे पंखों में । समस्त सृष्टि उसकी सुन्दर रचना है।

इसे पर्यटक बन कर भोगो।"


परम पूज्य सुधाँशुजी महाराज



"Only god should be in our minds if we want to acquire him. One can live in the world but the world should not be in the mind all the time.
God's ravishing and stunning beauty is everywhere, in flowers, in rivers and in the colorful feathers of butterflies.
Whole universe is his exquisite and magnificent creation. Enjoy all this as a traveler or tourist."

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Madan Gopal Garga द्वारा ADHYATMIK के लिए 9/10/2009 09:27:00 AM को पोस्ट किया गया

Sunday, September 13, 2009

जिंदगी - Life

जिंदगी -
Life



  • जिन्दगी को ऐक खेल बनाओ ! हर कर्म को खेल बनाओ ! दुखी मत हो ,हर समय खुश रहने की कोशिश करो ! उलझनें आयें तो सुलझाने की कोशिश करो !
  • संग्रह कर्ता राजगर्ग


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 9/13/2009 02:59:00 PM

Saturday, September 12, 2009

पारस मणी

पारस मणी



  • यदि आपने पात्रता सिद्ध करदी तो गुरु से सब कुछ ले सकते हो ! पारस मणि से भी कीमती हैं गुरु !



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Friday, September 11, 2009

उपासना

उपासना



  • सत्य को देखने की कोशिश करो ,प्रभू को समझो ,हवा साँसों में भर जायं ,समुन्द्र की लहरें आपकी नसों में लहराने लग जाये ,तब आपकी उपासना शुरू होती है !
  • संग्रह करता राज गर्ग


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 9/10/2009 05:26:00 PM

Wednesday, September 9, 2009

Guruvaanee - Guru's Directions

Guruvaanee - Guru's Directions

चकोर को चैन मिलता है चन्द्रमा को देखकर ,कमल खिलता है सूर्य को देखकर ,शिष्य का ह्रदय खिलता है , सदगुरु को देखकर !
ईंट पत्थर के तो मकान बनते हैं और भावनाओं से घर बनते हैं !

Tuesday, September 8, 2009

] गुरुवाणी

] गुरुवाणी



  • जैसे चुन-चुनकर चीजें घर का ड्राइंग-रूम सजाते हो , ऐसे ही चुन-चुनकर गुणों से ह्रदय के मन्दिर को सजाने की कोशिश करो !


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Posted By Madan Gopal Garga to ANANDDHAM.ORG at 9/06/2009 02:33:00 PM

Monday, September 7, 2009

बाधायें

बाधायें



  • बाधायें कब बाँध सकी हैं आगे बढ़ने वालों को
    विपदायें कब रुका सकी हैं आगे बढ़ने वालों को

Sunday, September 6, 2009

कार्य - Work

कार्य -
Work

  • यह सोचो कि जो कार्य कर रहे हो भगवान के लिये कर रहा हूं और भगवान का नाम ले कर काम शुरु करो ! जो कार्य हाथ में लो पूरा करने पर ही छोडो ! लगन लगा कर कार्य करो और फिर आनन्द लो नहीं तो मन दूसरी यरफ चला जाएगा !


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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 8/27/2009 12:37:00 PM

Saturday, September 5, 2009

निराश Frustration

निराश
Frustration

  • किसि की बात सुन कर निराश मत हो बढते चले जाओ !

    अराम इस पथ की राह नहीं है ,
    जिस से आगे राह नहीं है ,
    जीवन क्या है निरजन पथ है
    चल रहा दोनो किनारो पर
    मस्ती ही इसका पानी है !
Param Pujya Sudhanshuji Maharaj

मन की शान्ति (भाग -३ ) Peace of Mind Part 3

मन की शान्ति (भाग -३ ) - Peace of Mind Part 3

हर परिस्थिति में खुश रहो !
अगर खुश रहना चाहते जो तो खुशी बांटो शान्ति आएगी !
प्यार पाना चाहते जो तो प्यार बांटो -शांती आएगी !
वाणी और स्वाद पर नियंत्रण रखो !
हमेशा सत्य पर चलो !


--
Shirish Balekundri

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Friday, September 4, 2009

The Perfect 10 Principles of Life

The Perfect 10 Principles of Life

1. Forgive others and yourself:
Life is too short to hold on to regrets, grudges
or disappointments.

Free yourself by forgiving others and yourself and letting go
of any negative energy.


2. Practice gratitude and appreciation:

Focus on everything good in your life and you will feel grateful.
Also, appreciate the wonderful people around you.


3. Live each day as though it were your last:

In that way, you will be living in a state of purpose with
non-attachment to people or things and in one of love.


4. Meditate or pray:

You open up a direct link between yourself and spirituality
when you meditate or pray. You come closer to your creator energy
and experience peace, clarity and joy. You will reach a balanced state
between your mental, physical, emotional and spiritual realms.


5. Suspend judgment:

Judgment energy is dense, dark and heavy.
Let go of judging and criticizing others and yourself.
Everyone is on a different path and some appear to be farther ahead
on theirs than others. No path is better or worse than another.
Learn to accept.



6. View every experience as a gift:

If you look back at occurrences in your life, you can easily
see how
even the worst situations ended up teaching you

valuable lessons. This resulted in putting you in the perfect place
for your continuing development.


7. Stay consciously aware of all your thoughts and feelings:

It is easy to fall into bad patterns of complaining and feeling
like a victim of society and your life. When you catch yourself
in the negative zone, switch to one of gratitude and positive thinking.


8. Treat your physical body as your temple:

Your body is the only vehicle you've been given for this ride called life.
The better you care for your body by eating a healthy, balanced diet,
by following a regular exercise routine and by giving your body
the rest it requires, the more you will feel increased vitality.


9. View the world through the eyes of a child:

Children are happy observing and feeling the wonder and beauty
in every single thing. They can't get enough. Look at everything
and each human being as a child would and you'll be
in a constant position of surprise and enlightenment.


10. Give lots of love from your heart:

It's all about love. Love is the highest vibration.
Allow yourself to receive love unconditionally from others.
And, offer love from your heart in the same way to others and yourself and you will attain the highest state of awareness and bliss possible.

सदगुरु की अमृत वाणी - Enjoy Life While Praying

"भगवान को पाने के लिये मन में केवल भगवान को बिठाइये। संसार मै रहिये, किन्तु संसार को मन में मत बसा लीजिये।

परमात्मा का नूर चारों ओर बरस रहा है, फूलों में , नदियों में , तितलियों के रंगबिरंगे पंखों में । समस्त सृष्टि उसकी सुन्दर रचना है।

इसे पर्यटक बन कर भोगो।"


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"Only god should be in our minds if we want to acquire him. One can live in the world but the world should not be in the mind all the time.
God's ravishing and stunning beauty is everywhere, in flowers, in rivers and in the colorful feathers of butterflies.
Whole universe is his exquisite and magnificent creation. Enjoy all this as a traveler or tourist."

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Wednesday, September 2, 2009

मन की शान्ति के लिए (भाग -२)

मन की शान्ति के लिए (भाग -२)

  • अपनी इच्छायों को नियनत्रण में रखो !
  • क्रोध मत करो ,क्रोध आया भी हे तो बढ़ने मत दो ,पानी पी लो ,वह जगह छोड़ दो ,लंबे लंबे साँस लो !
  • हमेशा प्रसन्न रहने की कोशिश करो !
  • भगवान ने जो दिया हे उसी में खुश रहो ,जो नहीं दिया उसके बारे में सोच कर दुःखी मत हो !
  • किसी की तरक्की देख कर दुःखी मत हो -जलो मत ,उस की तरह बनने की कोशिश करो !
परम पूज्य सुधान्शुजी महाराज

Tuesday, September 1, 2009

कमाई - Earnings

कमाई -
Earnings

  • जिज्ञासु :- पूज्य गुरुदेव ! हम प्रयास बहुत करते हें लेकिन कमाई में बरकत नहीं है ! धन आता हें और चला जाता है कारण समझ नहीं आता ,कृपया मार्गदर्शन करें ?
  • महाराजश्री :- पुराणों में वर्णन आता है की किन किन कारणों से लक्षमी एक द्वार से आकर दुसरे द्वार से निकल जाती है , पुराण में कहते हैं की जिस घर में कलह कलेश हो ,महिला अपने नयनों से आँसू बहाती रहें और पुरूष अपना रोब दिखाता रहे , घर की अवस्था ठीक न हो , घर से वस्त्र मैले रहें वाणी मैली हो ,और वस्तुएं बिखरी पडी रहें ,बच्चे बड़ों का समान न करें और संसार के मालिक का नाम न लिया जाए ,अपने हाथों से पवित्र सेवा कार्य न होता हो उस घर से लक्षमी का वास नहीं होता ! अपने अधिक परिश्रम से अगर कोई लक्षमी को घर ले भी आए तो वहाँ बरकत नहीं होती


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Posted By Madan Gopal Garga to jigyasa aur samadhan at 8/31/2009 12:26:00 PM